1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 16 / Shloka 29 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 16
Shloka 29

Balkand

77 Sarga
32 Shloka
1/16/29
1-Balkand / Sarga 16 Shloka 29
Shloka
अनुचिन्त्य सुमित्रायै पुनरेव महामतिः ।
एवं तासां ददौ राजा भार्याणां पायसं पृथक् ॥१-१६-२९॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उन दोनोंको देनेके बाद जितनी खीर बच रही, उसका आधा भाग तो उन्होंने पुत्रप्राप्तिके उद्देश्यसे कैकेयीको दे दिया। तत्पश्चात् उस खीरका जो अवशिष्ट आधा भाग था, उस अमृतोपम भागको महाबुद्धिमान् नरेशने कुछ सोच-विचारकर पुन: सुमित्राको ही अर्पित कर दिया। इस प्रकार राजाने अपनी सभी रानियोंको अलग-अलग खीर बाँट दी॥ २८-२९॥