1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 16 / Shloka 23 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 16
Shloka 23

Balkand

77 Sarga
32 Shloka
1/16/23
1-Balkand / Sarga 16 Shloka 23
Shloka
ततो दशरथः प्राप्य पायसं देवनिर्मितम् ।
बभूव परमप्रीतः प्राप्य वित्तमिवाधनः ॥१-१६-२३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

इस प्रकार देवताओंकी बनायी हुई उस खीरको पाकर राजा दशरथ बहुत प्रसन्न हुए, मानो निर्धनको धन मिल गया हो। इसके बाद वह परम तेजस्वी अद्भुत पुरुष अपना वह काम पूरा करके वहीं अन्तर्धान हो गया॥ २३-२४॥