1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 16 / Shloka 21 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 16
Shloka 21

Balkand

77 Sarga
32 Shloka
1/16/21
1-Balkand / Sarga 16 Shloka 21
Shloka
तथेति नृपतिः प्रीतः शिरसा प्रतिगृह्य ताम् ।
पात्रीं देवान्नसम्पूर्णां देवदत्तां हिरण्मयीम् ॥१-१६-२१॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

राजाने प्रसन्नतापूर्वक ‘बहुत अच्छा’ कहकर उस दिव्य पुरुषकी दी हुई देवान्नसे परिपूर्ण सोनेकी थालीको लेकर उसे अपने मस्तकपर धारण किया। फिर उस अद्भुत एवं प्रियदर्शन पुरुषको प्रणाम करके बड़े आनन्दके साथ उसकी परिक्रमा की॥ २१-२२॥