1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 16 / Shloka 12 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 16
Shloka 12

Balkand

77 Sarga
32 Shloka
1/16/12
1-Balkand / Sarga 16 Shloka 12
Shloka
कृष्णं रक्ताम्बरधरं रक्तास्यं दुन्दुभिस्वनम् ।
स्निग्धहर्यक्षतनुजश्मश्रुप्रवरमूर्धजम् ॥१-१६-१२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उसकी अंगकान्ति काले रंगकी थी। उसने अपने शरीरपर लाल वस्त्र धारण कर रखा था। उसका मुख भी लाल ही था। उसकी वाणीसे दुन्दुभिके समान गम्भीर ध्वनि प्रकट होती थी। उसके रोम, दाढ़ी-मूँछ और बड़े-बड़े केश चिकने और सिंहके समान थे॥ १२॥