1-Balkand / Sarga 15
Shloka 22
Shloka
अवध्यं दैवतैर्विष्णो समरे जहि रावणम् ।स हि देवान् सगन्धर्वान् सिद्धांश्च ऋषिसत्तमान् ॥१-१५-२२॥
Sarga 15 / Shloka 22 Balkand