1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 15 / Shloka 12 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 15
Shloka 12

Balkand

77 Sarga
34 Shloka
1/15/12
1-Balkand / Sarga 15 Shloka 12
Shloka
एवमुक्तः सुरैः सर्वैश्चिन्तयित्वा ततोऽब्रवीत् ।
हन्तायं विदितस्तस्य वधोपायो दुरात्मनः ॥१-१५-१२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

समस्त देवताओंके ऐसा कहनेपर ब्रह्माजी कुछ सोचकर बोले—‘देवताओ! लो, उस दुरात्माके वधका उपाय मेरी समझमें आ गया। उसने वर माँगते समय यह बात कही थी कि मैं गन्धर्व, यक्ष, देवता तथा राक्षसोंके हाथसे न मारा जाऊँ। मैंने भी ‘तथास्तु’ कहकर उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली॥ १२-१३॥