1-Balkand / Sarga 14
Shloka 9
Shloka
गीतिभिर्मधुरैः स्निग्धैर्मन्त्राह्वानैर्यथार्हतः ।होतारो ददुरावाह्य हविर्भागान् दिवौकसाम् ॥१-१४-९॥
Sarga 14 / Shloka 9 Balkand