1-Balkand / Sarga 14
Shloka 47
Shloka
भवानेव महीं कृत्स्नामेको रक्षितुमर्हति ।न भूम्या कार्यमस्माकं नहि शक्ताः स्म पालने ॥१-१४-४७॥
Sarga 14 / Shloka 47 Balkand