1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 14 / Shloka 41 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 14
Shloka 41

Balkand

77 Sarga
60 Shloka
1/14/41
1-Balkand / Sarga 14 Shloka 41
Shloka
उक्थ्यं द्वितीयं संख्यातमतिरात्रं तथोत्तरम् ।
कारितास्तत्र बहवो विहिताः शास्त्रदर्शनात् ॥१-१४-४१॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

कल्पसूत्र और ब्राह्मणग्रन्थोंके द्वारा अश्वमेधके तीन सवनीय दिन बताये गये हैं। उनमेंसे प्रथम दिन जो सवन होता है, उसे चतुष्टोम (‘अग्निष्टोम’) कहा गया है। द्वितीय दिवस साध्य सवनको ‘उक्थ्य’ नाम दिया गया है तथा तीसरे दिन जिस सवनका अनुष्ठान होता है, उसे ‘अतिरात्र’ कहते हैं। उसमें शास्त्रीय दृष्टिसे विहित बहुत-से दूसरे-दूसरे क्रतु भी सम्पन्न किये गये॥ ४०-४१॥