1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 14 / Shloka 4 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 14
Shloka 4

Balkand

77 Sarga
60 Shloka
1/14/4
1-Balkand / Sarga 14 Shloka 4
Shloka
प्रवर्ग्यं शास्त्रतः कृत्वा तथैवोपसदं द्विजाः ।
चक्रुश्च विधिवत् सर्वमधिकं कर्म शास्त्रतः ॥१-१४-४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

ब्राह्मणोंने प्रवर्ग्य (अश्वमेधके अंगभूत कर्मविशेष) का शास्त्र (विधि, मीमांसा और कल्पसूत्र) के अनुसार सम्पादन करके उपसद नामक इष्टिविशेषका भी शास्त्रके अनुसार ही अनुष्ठान किया। तत्पश्चात् शास्त्रीय उपदेशसे अधिक जो अतिदेशत: प्राप्त कर्म है, उस सबका भी विधिवत् सम्पादन किया॥ ४॥