1-Balkand / Sarga 14
Shloka 33
Shloka
कौसल्या तं हयं तत्र परिचर्य समन्ततः ।कृपाणैर्विससारैनं त्रिभिः परमया मुदा ॥१-१४-३३॥
Sarga 14 / Shloka 33 Balkand