1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 14 / Shloka 3 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 14
Shloka 3

Balkand

77 Sarga
60 Shloka
1/14/3
1-Balkand / Sarga 14 Shloka 3
Shloka
कर्म कुर्वन्ति विधिवद् याजका वेदपारगाः ।
यथाविधि यथान्यायं परिक्रामन्ति शास्त्रतः ॥१-१४-३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

यज्ञ करानेवाले सभी ब्राह्मण वेदोंके पारंगत विद्वान् थे; अत: वे न्याय तथा विधिके अनुसार सब कर्मोंका उचित रीतिसे सम्पादन करते थे और शास्त्रके अनुसार किस क्रमसे किस समय कौन-सी क्रिया करनी चाहिये, इसको स्मरण रखते हुए प्रत्येक कर्ममें प्रवृत्त होते थे॥ ३॥