1-Balkand / Sarga 14
Shloka 23
Shloka
श्लेष्मातकमयो दिष्टो देवदारुमयस्तथा ।द्वावेव तत्र विहितौ बाहुव्यस्तपरिग्रहौ ॥१-१४-२३॥
Sarga 14 / Shloka 23 Balkand