1-Balkand / Sarga 14
Shloka 11
Shloka
न तेष्वहःसु श्रान्तो वा क्षुधितो वा न दृश्यते ।नाविद्वान् ब्राह्मणः कश्चिन्नाशतानुचरस्तथा ॥१-१४-११॥
Sarga 14 / Shloka 11 Balkand