1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 14 / Shloka 10 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 14
Shloka 10

Balkand

77 Sarga
60 Shloka
1/14/10
1-Balkand / Sarga 14 Shloka 10
Shloka
न चाहुतमभूत् तत्र स्खलितं वा न किञ्चन ।
दृश्यते ब्रह्मवत् सर्वं क्षेमयुक्तं हि चक्रिरे ॥१-१४-१०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उस यज्ञमें कोई अयोग्य अथवा विपरीत आहुति नहीं पड़ी। कहीं कोई भूल नहीं हुई—अनजानमें भी कोई कर्म छूटने नहीं पाया; क्योंकि वहाँ सारा कर्म मन्त्रोच्चारण-पूर्वक सम्पन्न होता दिखायी देता था। महर्षियोंने सब कर्म क्षेमयुक्त एवं निर्विघ्न परिपूर्ण किये॥ १०॥