1-Balkand / Sarga 13
Shloka 38
Shloka
सर्वकामैरुपहृतैरुपेतं वै समन्ततः ।द्रष्टुमर्हसि राजेन्द्र मनसेव विनिर्मितम् ॥१-१३-३८॥
Sarga 13 / Shloka 38 Balkand