1-Balkand / Sarga 13
Shloka 23
Shloka
तथा काशिपतिं स्निग्धं सततं प्रियवादिनम् ।सद्वृत्तं देवसंकाशं स्वयमेवानयस्व ह ॥१-१३-२३॥
Sarga 13 / Shloka 23 Balkand