1-Balkand / Sarga 12
Shloka 21
Shloka
ततो द्विजास्ते धर्मज्ञमस्तुवन् पार्थिवर्षभम् ।अनुज्ञातास्ततः सर्वे पुनर्जग्मुर्यथागतम् ॥१-१२-२१॥
Sarga 12 / Shloka 21 Balkand