1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 12 / Shloka 2 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 12
Shloka 2

Balkand

77 Sarga
22 Shloka
1/12/2
1-Balkand / Sarga 12 Shloka 2
Shloka
ततः प्रणम्य शिरसा तं विप्रं देववर्णिनम् ।
यज्ञाय वरयामास संतानार्थं कुलस्य च ॥१-१२-२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

तत्पश्चात् उन्होंने देवोपम कान्तिवाले विप्रवर ऋष्यशृंगको मस्तक झुकाकर प्रणाम किया और वंशपरम्पराकी रक्षाके लिये पुत्र-प्राप्तिके निमित्त यज्ञ करानेके उद्देश्यसे उनका वरण किया॥ २॥