1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 11 / Shloka 5 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 11
Shloka 5

Balkand

77 Sarga
31 Shloka
1/11/5
1-Balkand / Sarga 11 Shloka 5
Shloka
अनपत्योऽस्मि धर्मात्मञ्छान्ताभर्ता मम क्रतुम् ।
आहरेत त्वयाज्ञप्तः संतानार्थं कुलस्य च ॥१-११-५॥

Bhashya Content For This Shloka

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उनकी अंगराजके साथ मित्रता होगी। दशरथके एक परम सौभाग्यशालिनी कन्या होगी, जिसका नाम होगा ‘शान्ता’ । अंगदेशके राजकुमारका नाम होगा ‘रोमपाद’। महायशस्वी राजा दशरथ उनके पास जायँगे और कहेंगे—‘धर्मात्मन्! मैं संतानहीन हूँ। यदि आप आज्ञा दें तो शान्ताके पति ऋष्यशृंग मुनि चलकर मेरा यज्ञ करा दें। इससे मुझे पुत्रकी प्राप्ति होगी और मेरे वंशकी रक्षा हो जायगी’॥ ३—५॥