1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 11 / Shloka 23 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 11
Shloka 23

Balkand

77 Sarga
31 Shloka
1/11/23
1-Balkand / Sarga 11 Shloka 23
Shloka
ननन्दतुर्दशरथो रोमपादश्च वीर्यवान् ।
ततः सुहृदमापृच्छ्य प्रस्थितो रघुनन्दनः ॥१-११-२३॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

राजा रोमपादकी अनुमति ले ऋष्यशृंगने पत्नीके साथ वहाँसे प्रस्थान किया। उस समय शक्तिशाली राजा रोमपाद और दशरथने एक-दूसरेको हाथ जोड़कर स्नेहपूर्वक छातीसे लगाया तथा अभिनन्दन किया। फिर मित्रसे विदा ले रघुकुलनन्दन दशरथ वहाँसे प्रस्थित हुए॥ २२-२३॥