1-Balkand / Sarga 11
Shloka 23
Shloka
ननन्दतुर्दशरथो रोमपादश्च वीर्यवान् ।ततः सुहृदमापृच्छ्य प्रस्थितो रघुनन्दनः ॥१-११-२३॥
Sarga 11 / Shloka 23 Balkand