1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 11 / Shloka 22 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 11
Shloka 22

Balkand

77 Sarga
31 Shloka
1/11/22
1-Balkand / Sarga 11 Shloka 22
Shloka
स नृपेणाभ्यनुज्ञातः प्रययौ सह भार्यया ।
तावन्योन्याञ्जलिं कृत्वा स्नेहात्संश्लिष्य चोरसा ॥१-११-२२॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

राजा रोमपादकी अनुमति ले ऋष्यशृंगने पत्नीके साथ वहाँसे प्रस्थान किया। उस समय शक्तिशाली राजा रोमपाद और दशरथने एक-दूसरेको हाथ जोड़कर स्नेहपूर्वक छातीसे लगाया तथा अभिनन्दन किया। फिर मित्रसे विदा ले रघुकुलनन्दन दशरथ वहाँसे प्रस्थित हुए॥ २२-२३॥