1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 11 / Shloka 17 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 11
Shloka 17

Balkand

77 Sarga
31 Shloka
1/11/17
1-Balkand / Sarga 11 Shloka 17
Shloka
सखित्वात्तस्य वै राज्ञः प्रहृष्टेनान्तरात्मना ।
रोमपादेन चाख्यातमृषिपुत्राय धीमते ॥१-११-१७॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

तदनन्तर राजा रोमपादने मित्रताके नाते अत्यन्त प्रसन्न हृदयसे महाराज दशरथका शास्त्रोक्त विधिके अनुसार विशेषरूपसे पूजन किया और बुद्धिमान् ऋषिकुमार ऋष्यशृंगको राजा दशरथके साथ अपनी मित्रताकी बात बतायी। उसपर उन्होंने भी राजाका सम्मान किया॥