1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 11 / Shloka 13 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 11
Shloka 13

Balkand

77 Sarga
31 Shloka
1/11/13
1-Balkand / Sarga 11 Shloka 13
Shloka
सुमन्त्रस्य वचः श्रुत्वा हृष्टो दशरथोऽभवत् ।
अनुमान्य वसिष्ठं च सूतवाक्यं निशाम्य च ॥१-११-१३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

सुमन्त्रका वचन सुनकर राजा दशरथको बड़ा हर्ष हुआ। उन्होंने मुनिवर वसिष्ठजीको भी सुमन्त्रकी बातें सुनायीं और उनकी आज्ञा लेकर रनिवासकी रानियों तथा मन्त्रियोंके साथ अंगदेशके लिये प्रस्थान किया, जहाँ विप्रवर ऋष्यशृंग निवास करते थे॥ १३॥