1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 10 / Shloka 9 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 10
Shloka 9

Balkand

77 Sarga
33 Shloka
1/10/9
1-Balkand / Sarga 10 Shloka 9
Shloka
न तेन जन्मप्रभृति दृष्टपूर्वं तपस्विना
स्त्री वा पुमान्वा यच्चान्यत् सत्त्वं नगरराष्ट्रजम् ॥१-१०-९॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उन तपस्वी ऋषिकुमारने जन्मसे लेकर उस समयतक पहले कभी न तो कोई स्त्री देखी थी और न पिताके सिवा दूसरे किसी पुरुषका ही दर्शन किया था। नगर या राष्ट्रके गाँवोंमें उत्पन्न हुए दूसरे-दूसरे प्राणियोंको भी वे नहीं देख पाये थे॥ ९॥