1-Balkand / Sarga 10
Shloka 4
Shloka
इन्द्रियार्थैरभिमतैर्नरचित्तप्रमाथिभिःपुरमानाययिष्यामः क्षिप्रं चाध्यवसीयताम् ॥१-१०-४॥
Sarga 10 / Shloka 4 Balkand