1-Balkand / Sarga 10
Shloka 32
Shloka
अन्तःपुरं प्रवेश्यास्मै कन्यां दत्त्वा यथाविधिशान्तां शान्तेन मनसा राजा हर्षमवाप सः ॥१-१०-३२॥
Sarga 10 / Shloka 32 Balkand