1-Balkand / Sarga 10
Shloka 26
Shloka
उपसृत्य ततः सर्वास्तास्तमूचुरिदं वचःएह्याश्रमपदं सौम्य अस्माकमिति चाब्रुवन् ॥१-१०-२६॥
Sarga 10 / Shloka 26 Balkand