1-Balkand / Sarga 10
Shloka 20
Shloka
ततस्तास्तं समालिङ्ग्य सर्वा हर्षसमन्विताःमोदकान् प्रददुस्तस्मै भक्ष्यांश्च विविधाञ्छुभान् ॥१-१०-२०॥
Sarga 10 / Shloka 20 Balkand