1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 10 / Shloka 13 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 10
Shloka 13

Balkand

77 Sarga
33 Shloka
1/10/13
1-Balkand / Sarga 10 Shloka 13
Shloka
अदृष्टरूपास्तास्तेन काम्यरूपा वने स्त्रियः
हार्दात्तस्य मतिर्जाता आख्यातुं पितरं स्वकम् ॥१-१०-१३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

ऋष्यशृंगने वनमें कभी स्त्रियोंका रूप नहीं देखा था और वे स्त्रियाँ तो अत्यन्त कमनीय रूपसे सुशोभित थीं; अत: उन्हें देखकर उनके मनमें स्नेह उत्पन्न हो गया। इसलिये उन्होंने उनसे अपने पिताका परिचय देनेका विचार किया॥ १३॥