Shrimadbhagavadgita (Geetapress) Shrimad Bhagavadgita / 16/23

16/23
Shloka
यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः।
न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम्॥१६-२३॥
Shloka Pad
यः शास्त्र-विधिम् उत्सृज्य वर्तते काम-कारतः।
न सः सिद्धिम् अवाप्नोति न सुखम् न पराम् गतिम्॥१६-२३॥

Shrimadbhagavadgita (Geetapress)

हिन्दी
Shrimadbhagavadgita (Geetapress) - हिन्दी
Meaning

जो पुरुष शास्त्र विधि को त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करता है, वह न सिद्धि को प्राप्त होता है, न परम गति को और न सुखको ही॥ २३॥ 

Footnote

१. सर्व अनर्थों के मूल और नरक की प्राप्ति में हेतु होने से यहाँ काम, क्रोध और लोभ को 'नरक के द्वार' कहा है। 

२. अपने उद्धार के लिये भगवदाज्ञानुसार बरतना ही "अपने कल्याण का आचरण करना" है।