Shrimadbhagavadgita (Geetapress) Shrimad Bhagavadgita / 15/8

15/8
Shloka
शरीरं यदवाप्नोति यच्चाप्युत्क्रामतीश्वरः।
गृहीत्वैतानि संयाति वायुर्गन्धानिवाशयात्॥१५-८॥
Shloka Pad
शरीरम् यत् अवाप्नोति यत् च अपि उत्क्रामति ईश्वरः।
गृहीत्वा एतानि संयाति वायुः गन्धान् इव आशयात्॥१५-८॥

Shrimadbhagavadgita (Geetapress)

हिन्दी
Shrimadbhagavadgita (Geetapress) - हिन्दी
Meaning

वायु गन्ध के स्थान से गन्ध को जैसे ग्रहण करके ले जाता है, वैसे ही देहादि का स्वामी जीवात्मा भी जिस शरीर का त्याग करता है, उससे इन मन सहित इन्द्रियों को ग्रहण करके फिर जिस शरीर को प्राप्त होता है— उसमें जाता है॥ ८॥