१. आदिपुरुष नारायण वासुदेव भगवान् ही नित्य और अनन्त तथा सबके आधार होने के कारण और सबसे ऊपर नित्यधाम में सगुणरूप से वास करने के कारण ऊर्ध्व नाम से कहे गये हैं और वे मायापति, सर्वशक्तिमान् परमेश्वर ही इस संसार रूप वृक्ष के कारण हैं, इसलिये इस संसार – वृक्ष को 'ऊर्ध्वमूलवाला' कहते हैं।
२. उस आदिपुरुष परमेश्वर से उत्पत्ति वाला होने के कारण तथा नित्यधाम से नीचे ब्रह्मलोक में वास करने के कारण, हिरण्यगर्भ रूप ब्रह्मा को परमेश्वर की अपेक्षा ' अधः' कहा है और वही इस संसार का विस्तार करने वाला होने से इसकी मुख्य शाखा है, इसलिये इस संसार वृक्ष को 'अध: शाखावाला' कहते हैं।
३. इस वृक्ष का मूल कारण परमात्मा अविनाशी है तथा अनादिकाल से इसकी परम्परा चली आती है, इसलिये इस संसार वृक्ष को 'अविनाशी' कहते हैं।