Shloka
पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः॥९-२६॥
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पत्रम् पुष्पम् फलम् तोयम् यः मे भक्त्या प्रयच्छति।तत् अहम् भक्ति-उपहृतम् अश्नामि प्रयत आत्मनः॥९-२६॥
