Shrimad Bhagavadgita Adhyay 12 / Shloka 17

12/17
Shloka
यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति।
शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः॥१२-१७॥
Shloka Pad
यः न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति।
शुभ-अशुभ-परित्यागी भक्तिमान् यः सः मे प्रियः॥१२-१७॥

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Shrimadbhagavadgita (Geetapress) - हिन्दी
Meaning

इस सम्पूर्ण जगत् का धाता अर्थात् धारण करने वाला एवं कर्मों के फल को देने वाला, पिता, माता, पितामह, जानने योग्य, १ पवित्र ओंकार तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ॥ १७॥

Footnote

इस सम्पूर्ण जगत् का धाता अर्थात् धारण करने वाला एवं कर्मों के फल को देने वाला, पिता, माता, पितामह, जानने योग्य, १ पवित्र ओंकार तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ॥ १७॥

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