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Samveda Mantra 644

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- प्रजापतिः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
वि꣣दा꣢ रा꣣ये꣢ सु꣣वी꣢र्यं꣣ भ꣢वो꣣ वा꣡जा꣢नां꣣ प꣢ति꣣र्व꣢शा꣣ꣳ अ꣡नु꣢ । म꣡ꣳहिष्ठ वज्रिन्नृ꣣ञ्ज꣢से꣣ यः꣡ शवि꣢꣯ष्ठः꣣ शू꣡रा꣢णाम् ॥६४४

वि꣣दाः꣢ । रा꣣ये꣢ । सु꣣वी꣡र्य꣣म् । सु꣣ । वी꣡र्य꣢꣯म् । भु꣡वः꣢꣯ । वा꣡जा꣢꣯नाम् । प꣡तिः꣢꣯ । व꣡शा꣢꣯न् । अ꣡नु꣢꣯ । मँ꣡हि꣢꣯ष्ठ । व꣣ज्रिन् । ऋञ्ज꣡से꣢ । यः । श꣡वि꣢꣯ष्ठः । शू꣡रा꣢꣯णाम् ॥६४४॥

Mantra without Swara
विदा राये सुवीर्यं भवो वाजानां पतिर्वशाꣳ अनु । मꣳहिष्ठ वज्रिन्नृञ्जसे यः शविष्ठः शूराणाम् ॥६४४

विदाः । राये । सुवीर्यम् । सु । वीर्यम् । भुवः । वाजानाम् । पतिः । वशान् । अनु । मँहिष्ठ । वज्रिन् । ऋञ्जसे । यः । शविष्ठः । शूराणाम् ॥६४४॥

Samveda - Mantra Number : 644

Bhashya

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Meaning
हे जगदीश्वर ! आप (राये) विद्या, आरोग्य, धन, स्वराज्य, चक्रवर्ती राज्य आदि ऐश्वर्य के लिए तथा मोक्ष-रूप ऐश्वर्य के लिए हमें (सुवीर्यम्) उत्कृष्ट शारीरिक तथा आत्मिक बल (विदाः) प्राप्त कराइए। आप (वाजानाम्) बलों के (पतिः) अधीश्वर (भवः) हैं। (वशान्) आपकी कामना करनेवाले, आपकी प्रीति के अधीन हमें (अनु) अनुगृहीत कीजिए। हे (मंहिष्ठ) सबसे बड़े दानी, हे (वज्रिन्) ओजस्वी परमेश्वर ! आप (ऋञ्जसे) हमें ओज आदि गुणों से अलङ्कृत कीजिए, (यः) जो आप (शूराणाम्) शूरवीरों में (शविष्ठः) सबसे अधिक बली हैं ॥४॥
Essence
जो शरीर और आत्मा से बलवान् है, वही ऐश्वर्य प्राप्त करता है। अतः बलिष्ठ परमेश्वर के समान हम भी बलवान् बनें ॥४॥
Subject
अगले मन्त्र में पुनः परमात्मा से प्रार्थना की गयी है।

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