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Samveda Mantra 492

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- निध्रुविः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣पघ्न꣡न्प꣢वसे꣣ मृ꣡धः꣢ क्रतु꣣वि꣡त्सो꣢म मत्स꣣रः꣢ । नु꣣द꣡स्वादे꣢꣯वयुं꣣ ज꣡न꣢म् ॥४९२॥

अ꣣पघ्न꣢न् । अ꣣प । घ्न꣢न् । प꣣वसे । मृ꣡धः꣢꣯ । क्र꣣तुवि꣢त् । क्र꣣तु । वि꣢त् । सो꣣म । मत्सरः꣢ । नु꣣द꣡स्व꣢ । अ꣡दे꣢꣯वयुम् । अ । दे꣣वयुम् । ज꣡न꣢꣯म् ॥४९२॥

Mantra without Swara
अपघ्नन्पवसे मृधः क्रतुवित्सोम मत्सरः । नुदस्वादेवयुं जनम् ॥

अपघ्नन् । अप । घ्नन् । पवसे । मृधः । क्रतुवित् । क्रतु । वित् । सोम । मत्सरः । नुदस्व । अदेवयुम् । अ । देवयुम् । जनम् ॥४९२॥

Samveda - Mantra Number : 492
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 3;

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Meaning
हे (सोम) आनन्दरसागार परमेश्वर ! आप (मृधः) संग्रामकारी काम, क्रोध आदि रिपुओं को (अपघ्नन्) विनष्ट करते हुए (पवसे) हमें पवित्र करते हो। (क्रतुवित्) बुद्धि और कर्म दोनों प्राप्त करानेवाले, (मत्सरः) आनन्द-प्रदाता आप (अदेवयुम्) दिव्य गुणों की कामना न करनेवाले (जनम्) मनुष्य को (नुदस्व) दिव्य गुण प्राप्त करने के लिए प्रेरित करो ॥६॥
Essence
आनन्द-रस के खजाने परमेश्वर की सत्प्रेरणा से अपावन भी पावन और अदिव्य भी दिव्यगुणी हो जाते हैं ॥६॥
Subject
अगले मन्त्र में सोम परमात्मा से प्रार्थना की गयी है।

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