Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 256

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣भि꣡ त्वा꣢ पू꣣र्व꣡पी꣢तय꣣ इ꣢न्द्र꣣ स्तो꣡मे꣢भिरा꣣य꣡वः꣢ । स꣣मीचीना꣡स꣢ ऋ꣣भ꣢वः꣣ स꣡म꣢स्वरन्रु꣣द्रा꣡ गृ꣢णन्त पू꣣र्व्य꣢म् ॥२५६॥

अ꣣भि꣢ । त्वा꣣ । पूर्व꣡पी꣢तये । पू꣣र्व꣢ । पी꣣तये । इ꣡न्द्र꣢꣯ । स्तो꣡मे꣢꣯भिः । आ꣣य꣡वः꣢ । स꣣मीचीना꣡सः꣢ । स꣣म् । ईचीना꣡सः꣢ । ऋ꣣भ꣡वः꣢ । ऋ꣣ । भ꣡वः꣢꣯ । सम् । अ꣣स्वरन् । रुद्राः꣢ । गृ꣣णन्त पूर्व्य꣢म् ॥२५६॥

Mantra without Swara
अभि त्वा पूर्वपीतय इन्द्र स्तोमेभिरायवः । समीचीनास ऋभवः समस्वरन्रुद्रा गृणन्त पूर्व्यम् ॥

अभि । त्वा । पूर्वपीतये । पूर्व । पीतये । इन्द्र । स्तोमेभिः । आयवः । समीचीनासः । सम् । ईचीनासः । ऋभवः । ऋ । भवः । सम् । अस्वरन् । रुद्राः । गृणन्त पूर्व्यम् ॥२५६॥

Samveda - Mantra Number : 256
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 3;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) परमात्मन् ! (पूर्वपीतये) जिसका श्रेष्ठ रसास्वादन होता है, उस आनन्द के लिए (आयवः) मनुष्य (स्तोमेभिः) स्तोत्रों से (त्वा) आपकी (अभि) चारों ओर स्तुति करते हैं। (समीचीनासः) सम्यक् शुभकर्मों में संलग्न अथवा परस्पर संगत हुए (ऋभवः) मेधावी लोग (समस्वरन्) आपकी स्तुति करते हैं, (रुद्राः) सदुपदेशक, प्राणसाधक स्तोता लोग (पूर्व्यम्) पूर्वकाल में भी विद्यमान अर्थात् सनातन आपकी (गृणन्त) अर्चना करते हैं ॥४॥
Essence
आयुष्मान्, सामान्यजन, कर्मयोगी मेधावीजन, सदुपदेशक स्तोताजन सभी जिस परमात्मा की आराधना करते हैं, उसकी आराधना हम भी क्यों न करें ॥४॥
Subject
अगले मन्त्र में इस विषय का वर्णन है कि कौन-कौन परमात्मा की स्तुति करते हैं।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.