Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 1670

1875 Mantra
Devata- विष्णुः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्री꣡णि꣢ प꣣दा꣡ वि च꣢꣯क्रमे꣣ वि꣡ष्णु꣢र्गो꣣पा꣡ अदा꣢꣯भ्यः । अ꣢तो꣣ ध꣡र्मा꣢णि धा꣣र꣡य꣢न् ॥१६७०॥

त्री꣡णि꣢꣯ । प꣣दा꣢ । वि । च꣣क्रमे । वि꣡ष्णुः꣢꣯ । गो꣣पाः꣢ । गो꣣ । पाः꣢ । अ꣡दा꣢꣯भ्यः । अ । दा꣣भ्यः । अ꣡तः꣢꣯ । ध꣡र्मा꣢꣯णि । धा꣣र꣡य꣢न् ॥१६७०॥

Mantra without Swara
त्रीणि पदा वि चक्रमे विष्णुर्गोपा अदाभ्यः । अतो धर्माणि धारयन् ॥

त्रीणि । पदा । वि । चक्रमे । विष्णुः । गोपाः । गो । पाः । अदाभ्यः । अ । दाभ्यः । अतः । धर्माणि । धारयन् ॥१६७०॥

Samveda - Mantra Number : 1670
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 8; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 18; Khand » 2;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(गोपाः) रक्षक, (अदाभ्यः) किसी से भी हिंसित, पराजित या अपमानित नहीं किया जा सकनेवाला, (विष्णुः) सर्वान्तर्यामी जगदीश्वर (त्रीणि पदा) प्रकृति, जगत्प्रपञ्च और जीवात्माएँ इन तीनों में (विचक्रमे) व्याप्त है। (अतः) इसी कारण से, वह(धर्माणि) सब पदार्थों में उनके गुण-कर्म-स्वाभाव की(धारयन्) व्यवस्था कर रहा है ॥२॥
Essence
जो परमात्मा ब्रह्माण्ड के सब पदार्थों में व्याप्त है, वही उनको धारण करनेवाला भी है ॥२॥
Subject
आगे फिर परमेश्वर का विषय वर्णित करते हैं।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.