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Samveda Mantra 1260

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः स देवरातः कृत्रिमो वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ दे꣣वो꣡ वि꣢प꣣न्यु꣢भिः꣣ प꣡व꣢मान ऋता꣣यु꣡भिः꣢ । ह꣢रि꣣र्वा꣡जा꣢य मृज्यते ॥१२६०॥

ए꣡षः꣢ । दे꣣वः꣢ । वि꣣पन्यु꣡भिः꣢ । प꣡व꣢꣯मानः । ऋ꣣तायु꣡भिः꣢ । ह꣡रिः꣢꣯ । वा꣡जा꣢꣯य । मृ꣣ज्यते ॥१२६०॥

Mantra without Swara
एष देवो विपन्युभिः पवमान ऋतायुभिः । हरिर्वाजाय मृज्यते ॥

एषः । देवः । विपन्युभिः । पवमानः । ऋतायुभिः । हरिः । वाजाय । मृज्यते ॥१२६०॥

Samveda - Mantra Number : 1260
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 1;

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Meaning
(एषः) यह (देवः) विजय की इच्छावाला, (पवमानः) पुरुषार्थी, (हरिः) कर्मफलभोग के लिए एक शरीर से दूसरे शरीर में ले जाया गया जीवात्मा (ऋतायुभिः) सत्य आचरणवाले (विपन्युभिः) परमात्म-स्तोता विद्वानों द्वारा (वाजाय) बल देने के लिए (मृज्यते) शुद्ध किया जाता है ॥५॥
Essence
मानव-शरीर को प्राप्त जीवात्मा सत्याचारी परमात्म-स्तोताओं की सङ्गति करके स्वयं को उन्नत करे ॥५॥
Subject
आगे फिर जीवात्मा का विषय है।

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