Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Samveda Mantra 1026

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- नृमेध आङ्गिरसः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
त्व꣡मि꣢न्द्राभि꣣भू꣡र꣢सि꣣ त्व꣡ꣳ सूर्य꣢꣯मरोचयः । वि꣣श्व꣡क꣢र्मा वि꣣श्व꣡दे꣢वो म꣣हा꣡ꣳ अ꣢सि ॥१०२६॥

त्वम् । इ꣣न्द्र । अभिभूः꣢ । अ꣣भि । भूः꣢ । अ꣣सि । त्व꣢म् । सू꣡र्य꣢꣯म् । अ꣣रोचयः । विश्व꣡क꣢र्मा । वि꣣श्व꣢ । क꣣र्मा । विश्व꣡दे꣢वः । वि꣣श्व꣢ । दे꣣वः । महा꣢न् । अ꣣सि ॥१०२६॥

Mantra without Swara
त्वमिन्द्राभिभूरसि त्वꣳ सूर्यमरोचयः । विश्वकर्मा विश्वदेवो महाꣳ असि ॥

त्वम् । इन्द्र । अभिभूः । अभि । भूः । असि । त्वम् । सूर्यम् । अरोचयः । विश्वकर्मा । विश्व । कर्मा । विश्वदेवः । विश्व । देवः । महान् । असि ॥१०२६॥

Samveda - Mantra Number : 1026
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 7;

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (इन्द्र) जगदीश्वर ! (त्वम्) आप (अभिभूः) सब काम, क्रोध आदि शत्रुओं को परास्त करनेवाले (असि) हो, (त्वम्) आपने (सूर्यम्) सूर्य को (अरोचयः) चमकाया है। आप (विश्वकर्मा) सब कर्मों को करनेवाले, (विश्वदेवः) सबको आनन्द देनेवाले तथा (महान्) महान् (असि) हो ॥२॥
Essence
जो संसार की उत्पत्ति, स्थिति, प्रकाशप्रदान आदि कर्मों से तथा आनन्द देने के द्वारा हमारा उपकार करता है, उस अनन्त महिमावाले परमेश्वर के स्तुतिगीत सबको गाने चाहिएँ ॥२॥
Subject
अगले मन्त्र में परमेश्वर के गुण-कर्मों का वर्णन है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.