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Rigveda Mandal 7 / Sukta 35 / Mantra 2

104 Sukta
15 Mantra
7/35/2
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- वसिष्ठः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
शं नो॒ भगः॒ शमु॑ नः॒ शंसो॑ अस्तु॒ शं नः॒ पुरं॑धिः॒ शमु॑ सन्तु॒ रायः॑। शं नः॑ स॒त्यस्य॑ सु॒यम॑स्य॒ शंसः॒ शं नो॑ अर्य॒मा पु॑रुजा॒तो अ॑स्तु ॥२॥

शम् । नः॒ । भगः॒ । शम् । ऊँ॒ इति॑ । नः॒ । शंसः॑ । अ॒स्तु॒ । शम् । नः॒ । पुर॑म्ऽधिः । शम् । ऊँ॒ इति॑ । स॒न्तु॒ । रायः॑ । शम् । नः॒ । स॒त्यस्य॑ । सु॒ऽयम॑स्य । शंसः॑ । शम् । नः॒ । अ॒र्य॒मा । पु॒रु॒ऽजा॒तः । अ॒स्तु॒ ॥

Mantra without Swara
शं नो भगः शमु नः शंसो अस्तु शं नः पुरंधिः शमु सन्तु रायः। शं नः सत्यस्य सुयमस्य शंसः शं नो अर्यमा पुरुजातो अस्तु ॥

शम्। नः। भगः। शम्। ऊँ इति। नः। शंसः। अस्तु। शम्। नः। पुरम्ऽधिः। शम्। ऊँ इति। सन्तु। रायः। शम्। नः। सत्यस्य। सुऽयमस्य। शंसः। शम्। नः। अर्यमा। पुरुऽजातः। अस्तु ॥२॥

Ashtak » 5 Adhyay » 3 Varga » 28 Mantra » 2

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Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (नः) हम लोगों के लिये (भगः) ऐश्वर्य (शम्) सुख करनेवाला (नः) हम लोगों के लिये (शंसः) शिक्षा वा प्रशंसा (शम्) सुख करनेवाली (उ) और (पुरन्धिः) बहुत पदार्थ जिस में रक्खे जाते हैं वह आकाश (शम्) सुख करनेवाला (अस्तु) हो (नः) हम लोगों के लिये (रायः) धन (शम्) सुख करनेवाले (उ) ही (सन्तु) हों (नः) हम लोगों के लिये (सत्यस्य) यथार्थ धर्म वा परमेश्वर की (सुयमस्य) सुन्दर नियम से प्राप्त करने योग्य व्यवहार की (शंसः) प्रशंसा (शम्) सुख देनेवाली और (पुरुजातः) बहुत मनुष्यों में प्रसिद्ध (अर्यमा) न्यायकारी (नः) हमारे लिये (शम्) आनन्द देनेवाला (अस्तु) होवे, वैसा हम लोग प्रयत्न करें ॥२॥
Essence
हे मनुष्यो ! तुम जैसे ऐश्वर्य, पुण्यकीर्त्ति, अवकाश, धन, धर्म, योग और न्यायाधीश सुख करनेवाले हों, वैसा अनुष्ठान करो ॥३॥
Subject
मनुष्यों को जैसे ऐश्वर्य आदि सुख करनेवाले हों, वैसे विधान करना चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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