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Rigveda Mandal 6 / Sukta 60 / Mantra 12

75 Sukta
15 Mantra
6/60/12
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ता नो॒ वाज॑वती॒रिष॑ आ॒शून्पि॑पृत॒मर्व॑तः। इन्द्र॑म॒ग्निं च॒ वोळ्ह॑वे ॥१२॥

ता । नः॒ । वाज॑ऽवतीः । इषः॑ । आ॒शून् । पि॒पृ॒त॒म् । अर्व॑तः । इन्द्र॑म् । अ॒ग्निम् । च॒ । वोळ्ह॑वे ॥

Mantra without Swara
ता नो वाजवतीरिष आशून्पिपृतमर्वतः। इन्द्रमग्निं च वोळ्हवे ॥

ता। नः। वाजऽवतीः। इषः। आशून्। पिपृतम्। अर्वतः। इन्द्रम्। अग्निम्। च। वोळ्हवे ॥१२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 8 Varga » 29 Mantra » 2

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Meaning
हे मनुष्यो ! तुम जो (नः) हमारे लिये (वाजवतीः) प्रशस्त विज्ञानयुक्त (इषः) अन्नादि पदार्थों और (आशून्) शीघ्रगामी (अर्वतः) घोड़ों को (पिपृतम्) पूर्ण करते हैं (ता) उन (इन्द्रम्) बिजुली रूप अग्नि (अग्निम्, च) और प्रसिद्ध अग्नि को (वोळ्हवे) विमान आदि यानों को वहाने के लिये संग्र­ह करो ॥१२॥
Essence
हे मनुष्यो ! तुम बिजुली आदि पदार्थों से विमान आदि यानों को चलाकर इच्छाओं को पूर्ण करो ॥१२॥
Subject
फिर मनुष्यों को किससे क्या करने योग्य है, इस विषय को कहते हैं ॥

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