Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 6 / Sukta 13 / Mantra 3

75 Sukta
6 Mantra
6/13/3
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स सत्प॑तिः॒ शव॑सा हन्ति वृ॒त्रमग्ने॒ विप्रो॒ वि प॒णेर्भ॑र्ति॒ वाज॑म्। यं त्वं प्र॑चेत ऋतजात रा॒या स॒जोषा॒ नप्त्रा॒पां हि॒नोषि॑ ॥३॥

सः । सत्ऽप॑तिः । शव॑सा । ह॒न्ति॒ । वृ॒त्रम् । अ॒ग्ने॒ । विप्रः॑ । वि । प॒णेः । भ॒र्ति॒ । वाज॑म् । यम् । त्वम् । प्र॒ऽचे॒तः॒ । ऋ॒त॒ऽजा॒त॒ । रा॒या । स॒ऽजोषाः॑ । नप्त्रा॑ । अ॒पाम् । हि॒नोषि॑ ॥

Mantra without Swara
स सत्पतिः शवसा हन्ति वृत्रमग्ने विप्रो वि पणेर्भर्ति वाजम्। यं त्वं प्रचेत ऋतजात राया सजोषा नप्त्रापां हिनोषि ॥

सः। सत्ऽपतिः। शवसा। हन्ति। वृत्रम्। अग्ने। विप्रः। वि। पणेः। भर्ति। वाजम्। यम्। त्वम्। प्रऽचेतः। ऋतऽजात। राया। सऽजोषाः। नप्त्रा। अपाम्। हिनोषि ॥३॥

Ashtak » 4 Adhyay » 5 Varga » 15 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (ऋतजात) सत्य में प्रकट होनेवाले (प्रचेतः) अच्छे ज्ञान से युक्त (अग्ने) प्रकाशस्वरूप (विप्रः) बुद्धिमान् जन (त्वम्) आप जैसे (सत्पतिः) जल का पालक सूर्य्य (शवसा) बल से (वृत्रम्) मेघ का (हन्ति) नाश करता है और (पणेः) व्यवहारकर्त्ता के (वाजम्) अन्न वा विज्ञान को (वि, भर्ति) विशेष कर धारण करता है, वैसे (यम्) जिसको (सजोषाः) तुल्य प्रीति से सेवन करनेवाले आप (राया) धन से (अपाम्) जलों के (नप्त्रा) नहीं गिरनेवाले के साथ (हिनोषि) वृद्धि करे हो (सः) सो यह सब प्रकार से वृद्धि को प्राप्त होता है ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो बुद्धिमान् जन सूर्य्य के सदृश विद्या को प्रकाशित करके अविद्या का नाश करते हैं, वे अतुल सुख को प्राप्त होते हैं ॥३॥
Subject
फिर विद्वान् जन कैसा वर्त्ताव करें, इस विषय को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.