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Rigveda Mandal 5 / Sukta 84 / Mantra 2

87 Sukta
3 Mantra
5/84/2
Devata- पृथिवी Rishi- अत्रिः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
स्तोमा॑सस्त्वा विचारिणि॒ प्रति॑ ष्टोभन्त्य॒क्तुभिः॑। प्र या वाजं॒ न हेष॑न्तं पे॒रुमस्य॑स्यर्जुनि ॥२॥

स्तोमा॑सः । त्वा॒ । वि॒ऽचा॒रि॒णि॒ । प्रति॑ । स्तो॒भ॒न्ति॒ । अ॒क्तुऽभिः॑ । प्र । या । वाज॑म् । न । हेष॑न्तम् । पे॒रुम् । अस्य॑सि । अ॒र्जु॒नि॒ ॥

Mantra without Swara
स्तोमासस्त्वा विचारिणि प्रति ष्टोभन्त्यक्तुभिः। प्र या वाजं न हेषन्तं पेरुमस्यस्यर्जुनि ॥

स्तोमासः। त्वा। विऽचारिणि। प्रति। स्तोभन्ति। अक्तुऽभिः। प्र। या। वाजम्। न। हेषन्तम्। पेरुम्। अस्यसि। अर्जुनि ॥२॥

Ashtak » 4 Adhyay » 4 Varga » 29 Mantra » 2

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Meaning
हे (अर्जुनि) उषा के समान वर्त्तमान (विचारिणि) विचार करनेवाली स्त्री ! (या) जो तू (वाजम्) वेग के (न) समान (हेषन्तम्) शब्द करते हुए (पेरुम्) पूर्ण करनेवाले को (प्र, अस्यसि) फेंकती है उस (त्वा) तेरी (स्तोमासः) स्तुति करनेवाले जन (अक्तुभिः) रात्रियों से (प्रति, स्तोभन्ति) सब प्रकार स्तुति करते हैं ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। जैसे विद्वान् जन स्तुति करने योग्य जनों की स्तुति करते हैं, वैसे ही विद्यायुक्त स्त्री प्रशंसा करने योग्य की प्रशंसा करती है ॥२॥
Subject
फिर स्त्री कैसी हो, इस विषय को कहते हैं ॥

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