Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 5 / Sukta 14 / Mantra 1

87 Sukta
6 Mantra
5/14/1
Devata- अग्निः Rishi- सुतम्भर आत्रेयः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒ग्निं स्तोमे॑न बोधय समिधा॒नो अम॑र्त्यम्। ह॒व्या दे॒वेषु॑ नो दधत् ॥१॥

अ॒ग्निम् । स्तोमे॑न । बो॒ध॒य॒ । स॒म्ऽइ॒धा॒नः । अम॑र्त्यम् । ह॒व्या । दे॒वेषु॑ । नः॒ । द॒ध॒त् ॥

Mantra without Swara
अग्निं स्तोमेन बोधय समिधानो अमर्त्यम्। हव्या देवेषु नो दधत् ॥

अग्निम्। स्तोमेन। बोधय। सम्ऽइधानः। अमर्त्यम्। हव्या। देवेषु। नः। दधत् ॥१॥

Ashtak » 4 Adhyay » 1 Varga » 6 Mantra » 1

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे विद्वन् ! जो (समिधानः) उत्तम प्रकार स्वयं प्रकाशमान अग्नि (देवेषु) विद्वानों वा श्रेष्ठ गुणोंवाले पदार्थों में (नः) हम लोगों के लिये (हव्या) देने और ग्रहण करने योग्य वस्तुओं को (दधत्) धारण करता है, उस (अमर्त्यम्) मरणधर्म से रहित (अग्निम्) अग्नि को (स्तोमेन) गुणों की प्रशंसा से (बोधय) प्रकाशित कीजिये ॥१॥
Essence
हे मनुष्यो ! प्रयत्न से अग्नि आदि पदार्थों की विद्या को प्राप्त होओ ॥१॥
Subject
अब छः ऋचावाले चौदहवें सूक्त का आरम्भ है, उसके प्रथम मन्त्र में अग्निगुणों को कहते हैं ॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.