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Rigveda Mandal 4 / Sukta 8 / Mantra 2

58 Sukta
8 Mantra
4/8/2
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स हि वेदा॒ वसु॑धितिं म॒हाँ आ॒रोध॑नं दि॒वः। स दे॒वाँ एह व॑क्षति ॥२॥

सः । हि । वेद॑ । वसु॑ऽधितिम् । म॒हान् । आ॒ऽरोध॑नम् । दि॒वः । सः । दे॒वान् । आ । इ॒ह । व॒क्ष॒ति॒ ॥

Mantra without Swara
स हि वेदा वसुधितिं महाँ आरोधनं दिवः। स देवाँ एह वक्षति ॥

सः। हि। वेद। वसुऽधितिम्। महान्। आऽरोधनम्। दिवः। सः। देवान्। आ। इह। वक्षति॥२॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 8 Mantra » 2

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Meaning
हे मनुष्यो ! जिसको (दिवः) प्रकाश के (आरोधनम्) रोकने और (वसुधितिम्) द्रव्यों के धारण करनेवाले को विद्वान् (वेद) जानता है (सः) वह (हि) जिससे (महान्) बड़ा है और (सः) वह (इह) इस संसार में (देवान्) श्रेष्ठ गुण और भोगों को (आ, वक्षति) प्राप्त कराता है, ऐसा जानो ॥२॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो बिजुलीरूप अग्नि श्रेष्ठ भोग और गुणों का दाता सूर्य्य का भी सूर्य्य और सब का धारण करनेवाला व्याप्त है, उसको जानके कार्य्यों को सिद्ध करो ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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