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Rigveda Mandal 4 / Sukta 5 / Mantra 6

58 Sukta
15 Mantra
4/5/6
Devata- वैश्वानरः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
इ॒दं मे॑ अग्ने॒ किय॑ते पाव॒कामि॑नते गु॒रुं भा॒रं न मन्म॑। बृ॒हद्द॑धाथ धृष॒ता ग॑भी॒रं य॒ह्वं पृ॒ष्ठं प्रय॑सा स॒प्तधा॑तु ॥६॥

इ॒दम् । मे॒ । अ॒ग्ने॒ । किय॑ते । पा॒व॒क॒ । अमि॑नते । गु॒रुम् । भा॒रम् । न । मन्म॑ । बृ॒हत् । द॒धा॒थ॒ । धृ॒ष॒ता । ग॒भी॒रम् । य॒ह्वम् । पृ॒ष्ठम् । प्रय॑सा । स॒प्तऽधा॑तु ॥

Mantra without Swara
इदं मे अग्ने कियते पावकामिनते गुरुं भारं न मन्म। बृहद्दधाथ धृषता गभीरं यह्वं पृष्ठं प्रयसा सप्तधातु ॥

इदम्। मे। अग्ने। कियते। पावक। अमिनते। गुरुम्। भारम्। न। मन्म। बृहत्। दधाथ। धृषता। गभीरम्। यह्वम्। पृष्ठम्। प्रयसा। सप्तऽधातु॥६॥

Ashtak » 3 Adhyay » 5 Varga » 2 Mantra » 1

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Meaning
हे (पावक) पवित्र करनेवाले (अग्ने) अग्ने के सदृश वर्त्तमान ! आप (कियते) थोड़े सामर्थ्य से युक्त (अमिनते) नहीं हिंसा करनेवाले (मे) मेरे लिये (गुरुम्) बड़े (भारम्) भार के (न) सदृश (मन्म) विज्ञान को तथा (धृषता) ढीठ और (प्रयसा) प्रसन्नता के साथ (इदम्) इस (बृहत्) बढ़ानेवाले (गम्भीरम्) गम्भीर (पृष्ठम्) पूछने योग्य (यह्वम्) बड़े (सप्तधातु) सुवर्ण आदि सातों धातु जिसमें ऐसे धन को (दधाथ) धारण कीजिये ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो अल्पज्ञ और विद्यार्थीजन ज्ञानी विद्वान् के समीप से विज्ञान और धन के साधन की याचना करते हैं, वे विद्वान् होते हैं ॥६॥
Subject
अब अध्यापक विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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