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Rigveda Mandal 4 / Sukta 36 / Mantra 3

58 Sukta
9 Mantra
4/36/3
Devata- ऋभवः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- विराड्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
तद्वो॑ वाजा ऋभवः सुप्रवाच॒नं दे॒वेषु॑ विभ्वो अभवन्महित्व॒नम्। जिव्री॒ यत्सन्ता॑ पि॒तरा॑ सना॒जुरा॒ पुन॒र्युवा॑ना च॒रथा॑य॒ तक्ष॑थ ॥३॥

तत् । वः॒ । वा॒जाः॒ । ऋ॒भ॒वः॒ । सु॒ऽप्र॒वा॒च॒नम् । दे॒वेषु॑ । वि॒ऽभ्वः॒ । अ॒भ॒व॒त् । म॒हि॒ऽत्व॒नम् । जिव्री॒ इति॑ । यत् । सन्ता॑ । पि॒तरा॑ । स॒ना॒ऽजुरा॑ । पुनः॑ । युवा॑ना । च॒रथा॑य । तक्ष॑थ ॥

Mantra without Swara
तद्वो वाजा ऋभवः सुप्रवाचनं देवेषु विभ्वो अभवन्महित्वनम्। जिव्री यत्सन्ता पितरा सनाजुरा पुनर्युवाना चरथाय तक्षथ ॥

तत्। वः। वाजाः। ऋभवः। सुऽप्रवाचनम्। देवेषु। विऽभ्वः। अभवत्। महिऽत्वनम्। जिव्री इति। यत्। सन्ता। पितरा। सनाऽजुरा। पुनः। युवाना। चरथाय। तक्षथ ॥३॥

Ashtak » 3 Adhyay » 7 Varga » 7 Mantra » 3

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Meaning
हे (वाजाः) अन्न आदिकों से युक्त (ऋभवः) बुद्धिमानो ! (विभ्वः) सकल विद्याओं में व्याप्त (यत्) जो (वः) आप लोगों के प्रति (देवेषु) विद्वानों में (महित्वनम्) प्रतिष्ठा को (सुप्रवाचनम्) उत्तम प्रकार पढ़ाना और उपदेश करना (अभवत्) होवे (तत्) उसको प्राप्त होकर (जिव्री) जीवते हुए (सन्ता) विद्यमान और (सनाजुरा) सदा वृद्धावस्था को प्राप्त (पितरः) माता-पिता (चरथाय) चलने, विज्ञान वा भोजन के लिये (पुनः) फिर (युवाना) युवावस्था को प्राप्त हुए (तक्षथ) करो ॥३॥
Essence
हे बुद्धिमान् जनो ! जो आप लोग विद्वानों में स्थित होकर उनसे अध्ययन और उपदेश करें तो ज्ञानवृद्ध होने से युवावस्था को प्राप्त हुए भी वृद्ध होकर सत्कृत होवें ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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