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Rigveda Mandal 4 / Sukta 30 / Mantra 21

58 Sukta
24 Mantra
4/30/21
Devata- इन्द्र: Rishi- वामदेवो गौतमः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अस्वा॑पयद्द॒भीत॑ये स॒हस्रा॑ त्रिं॒शतं॒ हथैः॑। दा॒साना॒मिन्द्रो॑ मा॒यया॑ ॥२१॥

अस्वा॑पयत् । द॒भीत॑ये । स॒हस्रा॑ । त्रिं॒शत॑म् । हथैः॑ । दा॒साना॑म् । इन्द्रः॑ । मा॒यया॑ ॥

Mantra without Swara
अस्वापयद्दभीतये सहस्रा त्रिंशतं हथैः। दासानामिन्द्रो मायया ॥

अस्वापयत्। दभीतये। सहस्रा। त्रिंशतम्। हथैः। दासानाम्। इन्द्रः। मायया ॥२१॥

Ashtak » 3 Adhyay » 6 Varga » 23 Mantra » 1

Bhashya

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Meaning
जो (इन्द्रः) राजा (मायया) बुद्धि से (दासानाम्) सेवकों और शत्रुओं के (हथैः) हननसाधनों से (दभीतये) हिंसन करने के लिये (सहस्रा) असंख्य (त्रिंशतम्) वा तीस को (अस्वापयत्) सुलावे, वही जीतनेवाला होवे ॥२१॥
Essence
जो सेनापति आदि बुद्धि से शत्रुओं का नाश करें, वे सदा ही सुखी होवें ॥२१॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

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